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डीएफसीसीआईएल की उत्पत्ति

भारतीय रेल दिल्ली, मुंबई, चैन्नै और हाव़डा चार महानगरों को जो़डने वाली चतुर्भुज क़डी है जिसे आमतौर पर स्वर्ण चतुर्भुज और इसके दो विकर्णों (दिल्ली-चैन्नै और मुंबई-हावड़ा) के रूप में जाना जाता है । इस रूट की कुल लंबाई 10,122 कि.मी. है जिससे भारतीय रेल के मालभाड़ा यातायात की 55% से अधिक राजस्व आय आती है । पूर्वी कोरीडोर पर हावड़ा-दिल्ली की वर्तमान ब़डी लाइन और पश्चिमी कोरीडोर पर मुंबई-दिल्ली लाइन बहुत ही व्यस्त लाइन हैं जिनकी क्षमता का 115% से 150% तक उपयोग किया जा रहा है । पिछले कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की तीव्र वृद्धि ने रेल मालभाड़ा यातायात की अतिरिक्त क्षमता के लिए मांग उत्पन्न की है और भविष्य में इसके और अधिक ब़ढने की संभावना है । इस ब़ढती हुई मांग ने पूर्वी और पश्चिमी रूटों पर डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर्स की आवधारणा को जन्म दिया । माननीय रेल मंत्री ने संसद के सदन पटल पर वर्ष 2005-06 का रेल बजट प्रस्तुत करते हुए इस संबंध में ऐतिहासिक घोषणा की । अप्रैल 2005 में जापान-भारत की शिखर बैठक में परियोजना पर चर्चा की गई थी । जापानी सरकार द्वारा डेडीकेटेड रेल फ्रेट कोरीडोर्स की व्यवहार्यता अध्ययन और संभावित निधि के लिए भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों के बीच हुए हुए हस्ताक्षरित समझौते की घोषणा में इसे शामिल किया गया था । व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट अक्तूबर 2007 में रेल मंत्रालय को सौंप दी गई थी । इस बीच रेल मंत्रालय ने डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर्स के निर्माण, परिचालन और रखरखाव के लिए एक विशेष प्रयोजन संस्था की स्थापना के लिए कार्रवाई शुरू की । डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर्स की योजना एवं विकास, वित्तीय संसाधनों को गतिशील करने और निर्माण, रखरखाव और परिचालन का उत्तरदायित्व लेने के लिए डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर कार्पोरेशन आफ इंडिया लि. की स्थापना की गई। डीएफसीसी को कंपनी अधिनियम 1956 के अधीन अक्तूबर 2006 में एक कंपनी के रूप में शामिल किया गया ।

मिशन
डीएफसीसीआईएल का मिशन निम्नानुसार है:-

• डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर्स का निर्माण कर उसको एक लाभदायक व्यवसायिक इकाई के रूप में चलाना ।
• एक आधुनिक, तीव्र और सुरक्षित माल यातायात प्रणाली प्रदान करना ।
• रेल माल यातायात सेवाओं की गुणवत्ता और मूल्यों को बढ़ाते हुए रेल के माल यातायात व्यापार के हिस्से को बढ़ाना ।
• सड़क से रेल की ओर माडल को बढ़ावा देकर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना ।
• एक ऐसा संगठनात्मक पर्यावरण स्थापित करना जिसमें निष्ठा, गति और सफलता हो ।